राजस्थान की आर्थिक समीक्षा चैप्टर 1. कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण (Transformation in Agri-Food Systems)

1. कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण (Transformation in Agri-Food Systems)

कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ हैं। ये क्षेत्र सकल राज्य मूल्य वर्धन (जी.एस.वी.ए.), रोजगार सृजन और ग्रामीण आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

  • महत्व: यह क्षेत्र खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा विविध कृषि जलवायु परिस्थितियों, सीमित जल उपलब्धता और जलवायु परिवर्तनशीलता के उच्च जोखिम वाले राज्य में ग्रामीण विकास को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
  • रूपांतरण की आवश्यकता: राजस्थान की अधिकांश आबादी ग्रामीण है और आय व रोजगार के लिए कृषि पर निर्भर है। इसलिए समावेशी, सुदृढ़ एवं सतत आर्थिक विकास प्राप्त करने के लिए कृषि-खाद्य प्रणालियों का रूपांतरण अत्यंत आवश्यक है।
  • वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ: राजस्थान की कृषि प्रणालियाँ शुष्क एवं अर्ध-शुष्क परिस्थितियों, खंडित जोतों, मृदा क्षरण तथा जल अभाव जैसी प्राकृतिक बाधाओं के अंतर्गत संचालित होती हैं।
  • कदम एवं समाधान:
    • कुशल संसाधन प्रबंधन, सतत भूमि उपयोग और जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियों पर विशेष बल दिया गया है।
    • मृदा परीक्षण के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक इनपुट्स का संवर्धन किया जा रहा है।
    • वर्षा-आधारित क्षेत्रों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(A) पशुधन और मत्स्य पालन का योगदान

  • पशुधन: पशुधन राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है, जो विशेषकर शुष्क एवं सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में आय की स्थिरता प्रदान करता है। राजस्थान का राष्ट्रीय पशुधन आबादी, दुग्ध एवं ऊन उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। पशुधन विकास के प्रयासों में नस्ल सुधार, पशु चिकित्सा अवसंरचना का विस्तार, रोग नियंत्रण और चारा विकास शामिल है।
  • सहकारिता: सहकारी संस्थाओं के माध्यम से पशुपालन समावेशी ग्रामीण विकास का प्रमुख चालक बना है, जो सुनिश्चित बाजार और महिलाओं की सशक्त भागीदारी प्रदान करता है।
  • मत्स्य पालन: यह जल निकायों के उपयोग के माध्यम से आजीविका, रोजगार और पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।

(B) फसल कटाई-पश्चात प्रबंधन (Post-Harvest Management)

राज्य में कृषि-खाद्य प्रणालियों का रूपांतरण एक समग्र दृष्टिकोण के तहत किया जा रहा है, जो उत्पादन को फसल कटाई-पश्चात प्रबंधन, प्रसंस्करण, भंडारण एवं विपणन से जोड़ता है। सिंचाई अवसंरचना को सुदृढ़ करना, गुणवत्तापूर्ण बीज, भंडारण सुविधाओं का विस्तार और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना नुकसान को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किफायती ऋण और फसल बीमा से जोखिम कम किया जा रहा है।

2. दृष्टि वक्तव्य - विकसित राजस्थान @ 2047

वर्ष 2047 तक राजस्थान भारत का अग्रणी कृषि शक्ति बनेगा, जिससे बेहतर उत्पादकता, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता में वृद्धि होगी।

  • मुख्य लक्ष्य: पशुधन सशक्तिकरण, सहकारी संचालित अर्थव्यवस्थाओं और उन्नत कृषि-प्रौद्योगिकियों के माध्यम से समतापूर्ण ग्रामीण विकास।
  • कार्ययोजना: संतृप्ति-आधारित जलग्रहण हस्तक्षेप, वनरोपण, जैव-विविधता संरक्षण और जलवायु-अनुकूलित कृषि द्वारा क्षरित भूमि का पुनर्स्थापन एवं जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
  • प्रमुख क्षेत्र: जलवायु अनुकूलित कृषि, उच्च तकनीक वाली खेती, फसल विविधीकरण, प्रौद्योगिकी एवं स्वचालन, पशुधन एवं चारा अवसंरचना, मत्स्य पालन विकास, और कटाई उपरांत प्रबंधन।

3. कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र का योगदान और वृद्धि (5 वर्षीय विस्तृत आँकड़े)

कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (जी.वी.ए.) वर्ष 2021-22 के ₹1.92 लाख करोड़ (स्थिर कीमतों पर) से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹2.23 लाख करोड़ हो गया। वहीं प्रचलित कीमतों पर यह ₹3.23 लाख करोड़ से बढ़कर ₹4.41 लाख करोड़ हो गया है।

सकल मूल्य वर्धन (GVA) का 5-वर्षीय विस्तृत विवरण (₹ करोड़ में)

विवरण 2021-22 2022-23 2023-24 (संशोधित) 2024-25 (संशोधित) 2025-26 (अग्रिम)
GVA प्रचलित कीमतों पर 3,22,739 3,51,121 3,88,438 4,25,904 4,40,702
GVA स्थिर (2011-12) कीमतों पर 1,91,571 1,99,619 2,06,474 2,22,073 2,22,550
वृद्धि दर (प्रचलित कीमतों पर) 10.28% 8.79% 10.63% 9.65% 3.47%
वृद्धि दर (स्थिर कीमतों पर) 2.50% 4.20% 3.43% 7.56% 0.22%

विस्तृत विश्लेषण: वर्ष 2025-26 में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों का राजस्थान के कुल जी.वी.ए. में 25.74 प्रतिशत योगदान है, जो कि वर्ष 2011-12 में 28.56 प्रतिशत था।

उप-क्षेत्रों का योगदान और वृद्धि दर (वर्ष 2025-26)

कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र में फसल, पशुधन, मत्स्य, वानिकी एवं लॉगिंग शामिल हैं। इन क्षेत्रों की स्थिर कीमतों (2024-25 की तुलना में) पर वृद्धि दर इस प्रकार अनुमानित है:

  • पशुधन (Livestock): योगदान 49.35% | वृद्धि दर: 5.20%
  • फसल (Crop): योगदान 42.61% | वृद्धि दर: -5.01% (गिरावट)
  • वानिकी एवं लॉगिंग: योगदान 7.49% | वृद्धि दर: 2.67%
  • मत्स्य (Fisheries): योगदान 0.54% | वृद्धि दर: 0.87%

नोट: वर्ष 2025-26 में पशुधन क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन प्रचलित कीमतों पर ₹2.17 लाख करोड़ रहा, जो कि फसल क्षेत्र (₹1.88 लाख करोड़) से भी अधिक है!

4. प्रमुख खरीफ और रबी फसलों का सकल मूल्य उत्पाद (GVO)

राज्य में खरीफ फसलों में बाजरा, मूंगफली और मूंग प्रमुख हैं, जबकि रबी फसल क्षेत्र में गेहूं, राई-सरसों तथा चना का प्रमुख योगदान है!

(A) प्रचलित मूल्यों पर खरीफ फसलों का GVO (₹ करोड़ में)

फसल 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25 2025-26 (अग्रिम)
बाजरा 7,092 12,175 9,417 12,991 9,781
मूंगफली 8,762 11,306 14,563 10,961 15,978
मूंग 4,695 7,686 5,886 9,191 9,507

विश्लेषण: आँकड़ों से स्पष्ट है कि 2024-25 के मुकाबले 2025-26 में बाजरा के मूल्य में भारी गिरावट (12,991 से 9,781 करोड़) आई है, जबकि मूंगफली में शानदार वृद्धि (10,961 से 15,978 करोड़) दर्ज की गई है।

(B) प्रचलित मूल्यों पर रबी फसलों का GVO (₹ करोड़ में)

फसल 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25 2025-26 (अग्रिम)
गेहूं 23,789 28,615 28,761 40,970 38,394
राई एवं सरसों 46,577 32,795 32,298 31,760 34,826
चना 12,300 8,449 11,234 11,193 13,913

विश्लेषण: 2025-26 में गेहूं के मूल्य में कमी देखी गई है, लेकिन सरसों और चना की फसलों ने बेहतरीन वृद्धि दिखाते हुए किसानों की आय को स्थिर रखा है।

5. पशुधन उत्पादों का प्रतिशत हिस्सा (वर्ष 2025-26)

पशुधन क्षेत्र की आय में दूध का सबसे प्रमुख योगदान है। वर्ष 2025-26 में प्रचलित कीमतों पर सकल मूल्य उत्पाद (GVO) में पशुधन उत्पादों का हिस्सा इस प्रकार है:

  • दूध: 79.60%
  • पोल्ट्री सहित मांस: 12.27%
  • अन्य: 7.46%
  • अण्डे: 0.67%

6. समृद्ध कृषि के लिए कुशल भूमि उपयोग (Land Use Statistics 2024-25)

राजस्थान में शुष्क जलवायु, सीमित कृषि योग्य भूमि और जल संकट के कारण कुशल भूमि उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए ड्रिप सिंचाई, सूखा-प्रतिरोधी फसलें (बाजरा) और कृषि वानिकी को एकीकृत किया जा रहा है।

वर्ष 2024-25 में राज्य का रिपोर्टिंग क्षेत्र 343.43 लाख हेक्टेयर है। भूमि उपयोग का सांख्यिकीय विवरण प्रतिशत में निम्नलिखित है:

  • शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल: 53.02%
  • कृषि योग्य बंजर भूमि: 10.11%
  • वानिकी: 8.30%
  • ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि: 6.86%
  • गैर कृषि उपयोग अन्तर्गत भूमि: 5.96%
  • अन्य चालू पड़त भूमि: 5.62%
  • चालू पड़त: 5.22%
  • स्थायी चारागाह तथा अन्य गोचर भूमि: 4.81%
  • विविध वृक्ष फसलों और उपवनों के तहत् भूमि: 0.11%

1. प्रचालित जोत धारक (Operational Land Holdings: 2010-11 बनाम 2015-16)

कृषि गणना 2015-16 के अनुसार राज्य में कुल प्रचालित भूमि जोतों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन जोतों के कुल क्षेत्रफल और औसत आकार में कमी आई है। इसका मुख्य कारण संयुक्त परिवारों का विघटन (बंटवारा) और भूमि का विखंडन है।

(A) कुल भूमि जोत (Total Land Holdings)

विवरण वर्ष 2010-11 वर्ष 2015-16 तुलनात्मक बदलाव (Trend)
कुल जोतों की संख्या 68.88 लाख 76.55 लाख + 11.14% की वृद्धि
जोतों का कुल क्षेत्रफल 211.36 लाख हेक्टेयर 208.73 लाख हेक्टेयर - 1.24% की कमी
जोतों का औसत आकार 3.07 हेक्टेयर 2.73 हेक्टेयर - 11.07% की कमी

💡 विश्लेषण: राज्य में किसानों (खातों) की संख्या बढ़ी है, लेकिन खेती की कुल ज़मीन और प्रति किसान ज़मीन के हिस्से (औसत आकार) में कमी आई है। बड़े आकार की जोतों की संख्या 11.14% घटी है।

(B) महिला प्रचालित जोत धारक (Female Land Holdings)

महिलाओं के नाम पर कृषि भूमि के स्वामित्व में शानदार उछाल देखने को मिला है!

विवरण वर्ष 2010-11 वर्ष 2015-16 तुलनात्मक बदलाव (Trend)
महिला जोतों की संख्या 5.46 लाख 7.75 लाख + 41.94% की भारी वृद्धि
महिला जोतों का क्षेत्रफल 13.30 लाख हेक्टेयर 16.55 लाख हेक्टेयर + 24.44% की वृद्धि

💡 विश्लेषण: कृषि क्षेत्र में महिलाओं का स्वामित्व तेज़ी से बढ़ा है। यह महिला सशक्तिकरण और भूमि सुधारों का एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।

2. राजस्थान के कृषि-जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones)

भौगोलिक और जलवायु विविधता के कारण राजस्थान को 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है। राज्य का 61% भाग (उत्तर-पश्चिमी) रेगिस्तानी/अर्द्ध-रेगिस्तानी है जो वर्षा पर निर्भर है, जबकि 39% भाग (दक्षिण-पूर्वी) उपजाऊ है।

क्षेत्र का नाम सम्मिलित प्रमुख जिले मुख्य फसलें (खरीफ / रबी)
I-A: शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा खरीफ: बाजरा, मोठ / रबी: गेहूं, सरसों, जीरा
I-B: उत्तरी पश्चिमी सिंचित मैदानी क्षेत्र श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ खरीफ: कपास, ग्वार / रबी: गेहूं, सरसों, चना
I-C: अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी बीकानेर, जैसलमेर, चुरू (आंशिक) खरीफ: बाजरा, ग्वार / रबी: गेहूं, सरसों, चना
II-A: अन्तः स्थलीय जलोत्सरण (अन्तर्वर्ती) नागौर, डीडवाना, सीकर, झुन्झुनू, चुरू खरीफ: बाजरा, दलहन / रबी: सरसों, चना
II-B: लूनी बेसिन का अन्तर्वर्ती मैदान जालोर, पाली, सिरोही, ब्यावर (आंशिक) खरीफ: बाजरा, तिल / रबी: गेहूं, सरसों
III-A: अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्र जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक, खैरथल आदि खरीफ: बाजरा, ज्वार / रबी: गेहूं, सरसों, चना
III-B: बाढ़ सम्भाव्य पूर्वी मैदानी क्षेत्र अलवर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, सवाईमाधोपुर खरीफ: बाजरा, मूंगफली / रबी: गेहूं, जौ, सरसों
IV-A: अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र उदयपुर, चित्तौड़गढ़ (आंशिक), राजसमंद, भीलवाड़ा खरीफ: मक्का, ज्वार / रबी: गेहूं, चना
IV-B: आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूम्बर खरीफ: मक्का, धान, उड़द / रबी: गेहूं, चना
V: आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानी क्षेत्र कोटा, झालावाड़, बूंदी, बारां खरीफ: ज्वार, सोयाबीन / रबी: गेहूं, चना

3. राज्य में फसलों का उत्पादन: 2024-25 बनाम 2025-26

वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में राज्य के कृषि उत्पादन में मिले-जुले रुझान देखने को मिले हैं। जहाँ अनाज के उत्पादन में गिरावट आई है, वहीं दालों (दलहन) और तिलहन में शानदार वृद्धि हुई है।

(A) खाद्यान्न उत्पादन (अनाज + दालें) [लाख मीट्रिक टन में]

फसल का प्रकार उत्पादन (2024-25) उत्पादन (2025-26 अग्रिम) तुलनात्मक स्थिति (Trend)
कुल खाद्यान्न (Total Foodgrains) 309.62 283.98 - 8.28% की कमी
खरीफ खाद्यान्न 114.24 89.55 - 21.61% की भारी कमी
रबी खाद्यान्न 195.38 194.43 - 0.49% की कमी

💡 विश्लेषण: मॉनसून के असमान वितरण और वर्षा की अनिश्चितता के कारण मुख्य रूप से 'खरीफ' (बाजरा आदि) की पैदावार में 21.61% की बड़ी गिरावट आई है, जिससे कुल खाद्यान्न उत्पादन घटा है।

(B) दलहन और तिलहन का शानदार प्रदर्शन (लाख मीट्रिक टन में)

फसल का प्रकार उत्पादन (2024-25) उत्पादन (2025-26 अग्रिम) तुलनात्मक स्थिति (Trend)
कुल दलहन (Pulses) 41.80 47.13 वृद्धि हुई है
रबी दलहन (चना आदि) 21.75 26.61 + 22.34% की शानदार वृद्धि
कुल तिलहन (Oilseeds) 93.73 100.46 + 7.18% की वृद्धि
कपास (रूई - लाख गांठों में) 17.88 17.94 + 0.34% की मामूली वृद्धि
गन्ना (Sugarcane) 4.65 3.61 - 22.37% की गिरावट

💡 विश्लेषण: जहाँ अनाज का उत्पादन गिरा है, वहीं किसानों ने तिलहन (सरसों, मूंगफली) और दलहन (चना) की खेती से बेहतर पैदावार हासिल की है। रबी दलहन में 22.34% का उछाल एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

4. कृषि फसलों की उत्पादकता (Productivity) [कि.ग्रा./हेक्टेयर]

वर्ष 2024-25 तक की उत्पादकता (प्रति हेक्टेयर कितनी पैदावार हुई) के मुख्य आँकड़े इस प्रकार हैं:

  • अनाज: 2537 कि.ग्रा./हेक्टेयर
  • खाद्यान्न: 1940 कि.ग्रा./हेक्टेयर
  • तिलहन: 1537 कि.ग्रा./हेक्टेयर
  • दलहन: 773 कि.ग्रा./हेक्टेयर

5. कृषि फसलों के उत्पादन में राजस्थान का भारत में स्थान (2023-24)

भारत के कृषि परिदृश्य में राजस्थान कई फसलों के मामले में सिरमौर (Top Rank) बना हुआ है!

फसल का नाम भारत में राजस्थान का स्थान देश के कुल उत्पादन में राजस्थान का योगदान (%)
राई एवं सरसों प्रथम (1st) 43.43% (लगभग आधा उत्पादन राजस्थान में)
बाजरा प्रथम (1st) 41.34%
कुल तिलहन प्रथम (1st) 23.61%
ग्वार प्रथम (1st) 88.80% (सबसे बड़ा एकाधिकार)
मोटा अनाज प्रथम (1st) 14.21%
मूंगफली द्वितीय (2nd) 19.91%
चना / कुल दलहन / सोयाबीन तृतीय (3rd) 17.39% / 13.76% / 8.96%

💡 विश्लेषण: राजस्थान सरसों, बाजरा, ग्वार और कुल तिलहन के उत्पादन में पूरे देश में नंबर 1 पर है। ग्वार के मामले में तो देश का लगभग 89% उत्पादन अकेले राजस्थान करता है!

1. फल, सब्जियां और मसालों का उत्पादन (वर्ष 2023-24 बनाम 2024-25)

राजस्थान में पारंपरिक खेती (गेहूं, बाजरा) के साथ-साथ बागवानी (Horticulture) और मसालों की खेती का भी तेज़ी से विकास हो रहा है। नीचे दी गई तालिका में फल, सब्जी और मसालों के उत्पादन का तुलनात्मक विवरण है:

फसल का प्रकार उत्पादन 2023-24 (मैट्रिक टन) उत्पादन 2024-25 (मैट्रिक टन) तुलनात्मक स्थिति (क्या हुआ?)
फल (Fruits) 11,97,555 13,84,606 वृद्धि दर्ज की गई
सब्जियां (Vegetables) 27,11,816 28,60,484 उत्पादन बढ़ा
मसाले (Spices) 3,79,720 14,69,559 रिकॉर्ड 3 गुना वृद्धि!

💡 सरल शब्दों में समझें (विश्लेषण): आंकड़ों से बिल्कुल स्पष्ट है कि राजस्थान के किसानों ने मसालों (Spices) की खेती में क्रांति ला दी है। 2023-24 में मसालों का उत्पादन केवल 3.79 लाख मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में छलांग लगाकर 14.69 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया। फलों और सब्जियों के उत्पादन में भी लगातार सकारात्मक उछाल देखा गया है!

2. किसानों के लिए एकीकृत सहायता प्रणाली (Integrated Support System)

राज्य सरकार किसानों को बीज से लेकर बाज़ार तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान कर रही है। इसके प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

(A) गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरक

  • मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना: इसका उद्देश्य किसानों द्वारा स्वयं के खेतों पर उन्नत बीज का उत्पादन करना है। वर्ष 2025-26 में 1.13 लाख क्विंटल बीज उत्पादन के लक्ष्य के विरुद्ध 1.12 लाख क्विंटल बीज वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही नई किस्मों को लोकप्रिय बनाने के लिए 31.50 लाख निःशुल्क बीज मिनीकिट बाँटे गए हैं।
  • गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना: रासायनिक खादों का उपयोग कम करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत हर ब्लॉक के 50 किसानों को जैविक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) बनाने के लिए ₹10,000 की आर्थिक मदद दी जा रही है।

(B) तकनीक और प्रशिक्षण

  • नमो ड्रोन दीदी योजना: खेती को आधुनिक बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 1,070 कृषि ड्रोन दिए जा रहे हैं, जिस पर 3% अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिलेगा। इससे नैनो यूरिया और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव होगा।
  • कृषि क्लीनिक: किसानों को मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) और बीमारियों के इलाज की सलाह देने के लिए जिला स्तर पर 20 कृषि क्लीनिक (2024-25 में) स्थापित किए गए हैं और 13 नए बनाए जा रहे हैं।

3. कृषि ऋण एवं सहकारिता (Agri-Credit & Cooperatives)

कृषि के विकास और किसानों को साहूकारों के कर्ज से बचाने के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से सस्ते ऋण (लोन) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:

योजना का नाम प्रावधान और उपलब्धियां (वर्ष 2025-26)
शून्य प्रतिशत ब्याज फसली ऋण किसानों को 0% ब्याज पर अल्पकालीन लोन मिलता है। 30.45 लाख किसानों को ₹18,085.89 करोड़ का ऋण बांटा गया है।
राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना डेयरी और दूध उत्पादकों के लिए नई योजना। 2.5 लाख पशुपालकों को ₹1.00 लाख तक का ब्याज-मुक्त ऋण मिलेगा। इसके लिए 89,997 आवेदन मंजूर हो चुके हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) राज्य में अब तक 61.83 लाख KCC जारी किए गए हैं, जिनमें से 43.95 लाख कार्ड वर्तमान में सक्रिय (Active) हैं।
सहकार किसान कल्याण योजना फसल के अलावा कृषि यंत्र आदि खरीदने के लिए ₹10.00 लाख तक का ऋण
कृषि उपज गिरवी ऋण योजना किसान अपनी उपज को गोदाम में गिरवी रखकर मात्र 3% ब्याज दर पर ऋण ले सकते हैं।

💡 सरल शब्दों में समझें: राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन (गोपाल क्रेडिट कार्ड) और कृषि उपकरणों (सहकार किसान कल्याण) के लिए भी बिना किसी भारी ब्याज के पैसा प्राप्त कर सकें। 0% ब्याज दर के कारण 30 लाख से ज़्यादा किसानों को सीधा फायदा हुआ है!

4. फसल बीमा और आधारभूत संरचना (Insurance & Infrastructure)

(A) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर किसानों को सुरक्षा देने के लिए खरीफ 2016 से यह योजना लागू है। इसमें किसानों को बहुत मामूली प्रीमियम देना होता है:

  • खरीफ फसलें (बाजरा, मूंग आदि): केवल 2% प्रीमियम।
  • रबी फसलें (गेहूं, सरसों आदि): केवल 1.5% प्रीमियम।
  • वाणिज्यिक / बागवानी फसलें: 5% प्रीमियम।

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पात्र किसानों को ₹6,206.61 करोड़ के बीमा दावों (Claims) का भुगतान किया जा चुका है!

(B) कृषि अवसंरचना निधि (AIF)

खेत के पास ही गोदाम या अन्य बुनियादी ढाँचा बनाने के लिए केंद्र सरकार की इस योजना के तहत लिए गए ऋण पर प्रति वर्ष 3% की ब्याज सब्सिडी दी जाती है (₹2.00 करोड़ की सीमा तक)। राजस्थान में ₹4,212.54 करोड़ की 4,900 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है।

5. प्रमुख कृषि एवं बागवानी मिशन (Major Agricultural Missions)

उत्पादन को बढाने के लिए राज्य में विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मिशन चलाए जा रहे हैं:

  • राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM): यह 41 जिलों में लागू है। इसके तहत फलोद्यान, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, प्लास्टिक मल्चिंग और प्याज भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए ₹124.76 करोड़ का बजट है।
  • राष्ट्रीय बाँस मिशन & एग्रो-फॉरेस्ट्री: बाँस की खेती और नई नर्सरियां स्थापित करने के लिए सरकार वित्तीय अनुदान दे रही है।
  • पोषक अनाज (श्री अन्न) मिशन: वर्ष 2018-19 से बाजरा और ज्वार को "पोषक अनाज" (Nutri-cereals) में शामिल किया गया है। इसके तहत उन्नत बीजों का वितरण और प्रदर्शन किया जा रहा है। 2025-26 में बाजरा के लिए 28 जिलों और ज्वार के लिए 11 जिलों को शामिल किया गया है।
  • (नया अपडेट) दलहन में आत्मनिर्भरता हेतु मिशन: भारत सरकार ने रबी 2025-26 से पुराने दलहन मिशन को एक नई योजना "दलहन में आत्मनिर्भरता हेतु मिशन (2025-26 से 2030-31)" में मिला दिया है। इसका मुख्य फोकस तुअर, उड़द और मसूर के उत्पादन को बढ़ाना और NCCF/NAFED के माध्यम से इनकी 100% खरीद सुनिश्चित करना है।

1. जैविक खेती और कृषि की नवीन योजनाएँ

कृषि क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक विकास के लिए राज्य में दो प्रमुख योजनाएँ संचालित की जा रही हैं:

(A) परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)

  • उद्देश्य: पर्यावरण-अनुकूल और कम लागत वाली तकनीकों को अपनाकर रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन करना।
  • प्रमाणीकरण: जैविक खेती को 'क्लस्टर पद्धति' एवं 'सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS-India)' प्रमाणन के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाता है।
  • प्रगति: वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक) में इस योजना के अंतर्गत ₹42.07 करोड़ के प्रावधान के विरुद्ध ₹4.20 करोड़ व्यय किये गए हैं।

(B) प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) - नयी पहल

  • शुरुआत: भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में यह नई योजना 6 वर्षों की अवधि के लिए लागू की गई है।
  • विशेषता: इसमें 11 मंत्रालयों और विभागों की प्रमुख योजनाओं को एकीकृत किया गया है। यह पूरे देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों के समग्र विकास के लिए है।
  • राजस्थान के चयनित जिले: बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू और जालौर (कुल 8 जिले)।

2. कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भौतिक प्रगति (वर्ष 2025-26)

दिसंबर 2025 तक राज्य के कृषि विभाग ने किसानों के बुनियादी ढांचे और संसाधनों के विकास में क्या लक्ष्य हासिल किए, इसका विवरण नीचे दिया गया है:

घटक का नाम लक्ष्य (Target) उपलब्धि (दिसंबर 2025 तक)
पाईप लाईन 20,000 कि.मी. 10,073 कि.मी.
डिग्गी (जल संचयन) 10,000 4,979
फार्म पॉण्ड 25,000 10,626
कृषि उपकरण वितरण 1,00,000 28,479
जिप्सम वितरण 30,000 मैट्रिक टन 8,090 मैट्रिक टन
बीज मिनीकिट वितरण 31,50,000 31,49,683 (लगभग 100% पूर्ण)
मृदा स्वास्थ्य कार्ड 4,05,000 4,14,714 (लक्ष्य से अधिक)
कांटेदार तारबंदी (फेंसिंग) 3,00,00,000 मीटर 94,69,496 मीटर

3. फसल कटाई के बाद प्रबंधन (Post-Harvest Management)

फसल कटाई के बाद कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने और उनका सही दाम दिलाने के लिए भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था की गई है।

(A) भंडारण (Storage)

  • राजस्थान राज्य भण्डारण निगम (RSWC): यह राज्य में 36 जिलों में 97 गोदामों का संचालन करता है।
  • भंडारण क्षमता: दिसंबर 2025 तक कुल भंडारण क्षमता 17.25 लाख मैट्रिक टन रही, जिसका 48% (8.25 लाख मैट्रिक टन) उपयोग किया गया।
  • विशेष छूट: सरकार भंडारण शुल्क पर SC/ST किसानों को 70%, उत्पादक संगठनों को 60%, सामान्य किसानों को 30% और सहकारी समितियों को 10% की भारी छूट देती है (जो पूरे भारत में सर्वाधिक है)।

(B) प्रसंस्करण (Processing) एवं निवेश

  • राइजिंग राजस्थान समिट 2024: कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुल 2,524 समझौता ज्ञापन (MOU) हुए हैं, जिनसे ₹43,794.84 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
  • PM-FME योजना: सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए इस योजना को 2025-26 तक बढ़ा दिया गया है। इसमें 35% अनुदान (अधिकतम ₹10 लाख) दिया जाता है।
  • राज स्पाइस ऐप (Raj Spice App): 8 सितंबर 2025 को जयपुर में आयोजित "राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव 2025" में मुख्यमंत्री द्वारा मसाला व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यह ऐप लॉन्च किया गया, जिस पर 4,000 व्यापारी जुड़ चुके हैं।

(C) कृषि विपणन (Agricultural Marketing)

  • कृषक उपहार योजना: ई-नाम (e-NAM) पोर्टल पर उपज बेचने वाले किसानों को ₹10,000 की बिक्री पर लॉटरी कूपन मिलते हैं। दिसंबर 2025 तक 798 लॉटरी के जरिये ₹1.38 करोड़ के पुरस्कार बांटे गए।
  • मंडी विकास: मंडियों और उनके आसपास के रास्तों के विकास पर ₹513.65 करोड़ खर्च कर 47.38 किमी सड़कें बनाई गई हैं।
  • सहकारी उपभोक्ता संरचना: कॉनफेड (CONFED) के नेतृत्व में 38 थोक भंडार काम कर रहे हैं, जिन्होंने ₹1,073.82 करोड़ का व्यवसाय किया है।

💡 विश्लेषण: राजस्थान सरकार ने फसल को केवल उगाने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि उपज को गोदाम में रखने (70% तक की छूट), फैक्ट्री लगाकर प्रोसेस करने (35% सब्सिडी) और ई-नाम पर बेचने (लॉटरी इनाम) के लिए एक पूरा 'इको-सिस्टम' तैयार कर दिया है। इससे किसानों की आय कई गुना बढ़ेगी।

4. पशुधन: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ (Livestock Sector)

शुष्क और अर्द्ध-शुष्क पश्चिमी राजस्थान में पशुपालन अकाल और सूखे के खिलाफ एक "सुरक्षा कवच" का काम करता है।

राजस्थान का राष्ट्रीय पशुधन में योगदान (पशु गणना-2019)

राज्य में कुल 568.01 लाख पशुधन है, जो भारत के कुल पशुधन का 10.60% है।

  • ऊँट: 84.43% (भारत में सर्वाधिक)
  • बकरियां: 14.00%
  • भैंस: 12.47%
  • भेड़: 10.64%
  • मवेशी (गाय आदि): 7.24%

उत्पादन (2023-24): राजस्थान भारत के कुल दूध उत्पादन का 14.51% और ऊन उत्पादन का शानदार 47.53% योगदान देता है!

5. पशु चिकित्सा संस्थाएँ एवं अवसंरचना

पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और नस्ल सुधार के लिए राज्य में पशु चिकित्सा केंद्रों का बड़ा जाल बिछाया गया है। नीचे दी गई तालिका में दिसंबर 2025 तक की स्थिति दर्शाई गई है:

पशु चिकित्सा संस्था का प्रकार वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक)
पॉलीक्लिनिक 73 98
प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय 848 873
पशु चिकित्सालय 2242 2243
पशु चिकित्सा उप-केन्द्र 7563 7712

💡 विश्लेषण: पिछले कुछ वर्षों में पशु चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। राज्य के गाँव-ढाणी तक पॉलीक्लिनिक और उप-केन्द्र (7,712) पहुंच गए हैं, जिससे पशुधन मृत्यु दर को कम करने में बड़ी सफलता मिलेगी।

1. पशुधन उत्पाद एवं चिकित्सा अवसंरचना (Livestock & Vet Infrastructure)

राजस्थान में पशुधन क्षेत्र का विकास तेज़ी से हो रहा है। राज्य सरकार ने घर बैठे पशु चिकित्सा सुविधा पहुँचाने के लिए एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है।

(A) पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार (वर्ष 2025-26 के मुख्य बिंदु)

  • मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा: आपातकालीन चिकित्सा के लिए '108' एंबुलेंस की तर्ज पर टोल-फ्री कॉल सेंटर 1962 और 536 मोबाइल पशु चिकित्सा वैन शुरू की गई हैं।
  • नई संस्थाएँ: 700 नए पशु चिकित्सा उपकेंद्र और 2 नए पशु चिकित्सालय खोले गए। इसके अलावा 151 उपकेंद्रों को चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया गया।
  • नाबार्ड का सहयोग: 310 नए पशु चिकित्सालय भवनों के निर्माण के लिए ₹144.15 करोड़ की स्वीकृति।
  • निःशुल्क टीकाकरण: 1.86 करोड़ गाय एवं भैंसों का खुरपका-मुंहपका (FMD) रोग हेतु तथा 108.30 लाख गायों का लंपी स्किन डिजीज (LSD) हेतु निःशुल्क टीकाकरण किया गया।

(B) पशुधन उत्पादों का तुलनात्मक उत्पादन (2019-20 से 2023-24)

वर्ष दुग्ध उत्पादन (हजार टन) अण्डा उत्पादन (दस लाख) मांस उत्पादन (हजार टन) ऊन उत्पादन (लाख किग्रा.)
2019-20 26,572 2,698 200 144
2021-22 33,265 2,688 221 156
2023-24 34,733 3,087 247 160

💡 विश्लेषण: आंकड़ों से स्पष्ट है कि 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य में दूध, अंडे, मांस और ऊन—चारों प्रमुख पशुधन उत्पादों में शानदार और लगातार वृद्धि हुई है।

2. पशु कल्याण, बीमा और गोपालन योजनाएँ

(A) प्रमुख पशु बीमा योजनाएँ

  • मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना: देशी नस्ल की गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊँट के लिए 1 दिसंबर 2025 से मुफ्त बीमा शुरू। प्रीमियम का 100% खर्च राज्य सरकार उठा रही है, जिससे 42 लाख पशुओं को कवर मिलेगा।
  • राज सरस सुरक्षा कवच बीमा: दूध उत्पादकों की दुर्घटना/मृत्यु होने पर ₹5 लाख और आंशिक विकलांगता पर ₹2.5 लाख का क्लेम।

(B) गोपालन (Gopalan) एवं अनुदान

देशी गोवंश के संरक्षण और नंदीशालाओं (आवारा पशुओं) के लिए अनुदान की राशि को बढ़ा दिया गया है!

योजना का नाम / श्रेणी पुरानी सहायता दर नई अनुदान दर (1 अप्रैल 2025 से लागू)
बड़े पशु (गाय/बैल) ₹44 प्रति पशु, प्रतिदिन ₹50 प्रति पशु, प्रतिदिन
छोटे पशु (बछड़े आदि) ₹22 प्रति पशु, प्रतिदिन ₹25 प्रति पशु, प्रतिदिन
गौशाला विकास योजना - बुनियादी ढांचे के लिए अधिकतम ₹10 लाख (90:10 जनसहभागिता)

3. डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन (Dairy & Fisheries)

(A) राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) की उपलब्धियां

  • मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना: दूध उत्पादकों को मिलने वाली सब्सिडी ₹2 से बढ़ाकर ₹5 प्रति लीटर कर दी गई है।
  • दुग्ध संकलन: दिसंबर 2025 तक RCDF से जुड़े 24 दुग्ध संघों ने औसतन 30.29 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध खरीदा है।
  • वर्तमान में लगभग 10 लाख दूध उत्पादक किसान इस डेयरी विकास कार्यक्रम से जुड़े हैं।

(B) मत्स्य पालन (Fisheries) उत्पादन

राज्य में लगभग 4.30 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र उपलब्ध है। "प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना" के तहत तालाब, झींगा पालन और केज कल्चर को भारी अनुदान दिया जा रहा है।

वर्ष मत्स्य उत्पादन (मीट्रिक टन) मत्स्य बीज उत्पादन (मिलियन) राजस्व (₹ करोड़ में)
2021-22 65,693.92 1,181.40 41.35
2024-25 1,13,647.21 1,382.39 66.66

विशेष कार्य: खारे जल में झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए चूरू में खारे पानी की जलीय कृषि प्रयोगशाला स्थापित की गई है!

4. किसानों एवं कृषि श्रमिकों के कल्याण हेतु 'मेगा-योजनाएँ'

किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार ने नकद सहायता और बोनस की झड़ी लगा दी है:

(A) प्रत्यक्ष नकद सहायता (DBT Transfers)

  • पी.एम. किसान (PM-Kisan): 21वीं किस्त के तहत 65.29 लाख किसानों को ₹1,305.80 करोड़ की राशि भेजी गई। लाभार्थियों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में 5वें स्थान पर है।
  • मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना: वार्षिक सहायता ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 कर दी गई है। (71.79 लाख किसान लाभान्वित)
  • वृद्ध किसान सम्मान पेंशन: छोटे और सीमांत किसानों (महिलाएं 55+ वर्ष, पुरुष 58+ वर्ष) को हर महीने ₹1,250 की पेंशन

(B) उपज की खरीद और बोनस

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद: रबी 2025-26 के लिए गेहूं की MSP ₹2,425 प्रति क्विंटल तय की गई।
  • राजस्थान कृषक समर्थन योजना: किसानों को MSP के ऊपर ₹150 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया गया (राज्य सरकार ने इसके लिए ₹320.50 करोड़ चुकाए)।
  • ऋण माफ़ी: 30 नवंबर 2018 तक के बकाया अल्पकालिक फसल ऋणों को माफ़ कर 20.92 लाख किसानों को ₹7,881.89 करोड़ की राहत दी गई।

(C) कृषि शिक्षा में बालिकाओं को भारी प्रोत्साहन

कृषि की पढ़ाई करने वाली छात्राओं को हर साल छात्रवृत्ति दी जा रही है:

  • सीनियर सेकेंडरी (11वीं-12वीं कृषि): ₹15,000 प्रति वर्ष।
  • बी.एस.सी. / एम.एस.सी. (कृषि): ₹25,000 प्रति वर्ष।
  • पीएच.डी. (कृषि): ₹40,000 प्रति वर्ष। (25,862 लड़कियों को 48.03 करोड़ का लाभ)।

(D) मंडी श्रमिकों के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले योजना

मंडी में काम करने वाले मजदूरों (हमाल) के लिए शानदार सुविधाएँ:

  • गर्भावस्था सहायता: महिला मजदूरों को 45 दिन की और नए पिता को 15 दिन की वेतन के बराबर छुट्टी/मजदूरी।
  • विवाह सहायता: अपनी या दो बेटियों की शादी के लिए ₹75,000
  • चिकित्सा सहायता: कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ₹20,000 की मदद।

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