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राजस्थान इतिहास – प्रमुख अभिलेख, ताम्रपत्र, सिक्के एवं साहित्यिक स्रोत

ाजस्थान के इतिहास के अध्ययन में शिलालेख, ताम्रपत्र, सिक्के एवं साहित्यिक स्रोत अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नीचे प्रमुख स्रोतों का विवरण दिया गया है।

प्रमुख शिलालेख

महत्वपूर्ण
ये सभी अभिलेख राजस्थान के इतिहास, प्रशासन, समाज एवं संस्कृति की जानकारी देते हैं।
  1. चीरवे का शिलालेख (1273 ई.)
    • चीरवा (उदयपुर) गाँव के एक मंदिर से प्राप्त संस्कृत में 51 श्लोकों का शिलालेख
    • प्रारंभिक गुहिलवंशीय शासकों, विष्णु मंदिर की स्थापना, शिव मंदिर हेतु भू-अनुदान की जानकारी।
    • प्रशस्तिकार रत्नप्रभसूरि, लेखक पार्श्वचन्द्र तथा शिल्पी देलहण का उल्लेख।
  2. रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.)
    • रणकपुर के जैन चौमुखा मंदिर में स्थित।
    • मेवाड़ के शासक बापा से कुम्भा तक की वंशावली है।
    • नाणक शब्द का प्रयोग मुद्रा के लिये किया गया है।
    • मंदिर के सूत्रधार दीपा या देपाक का उल्लेख है।
  3. कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति (1460 ई.)
    • 1 से 28 तथा 162 से 187 तक श्लोक उपलब्ध हैं।
    • बापा, हम्मीर, कुम्भा का वर्णन।
    • कुम्भा के व्यक्तिगत गुणों एवं उपाधियों का उल्लेख।
    • कुम्भा द्वारा रचित ग्रंथ – चण्डीशतक, गीतगोविन्द की टीका, संगीतराज।
    • मालवा एवं गुजरात की संयुक्त सेनाओं पर विजय का वर्णन।
    • रचयिता – अत्रि एवं महेश।
  4. रायसिंह की प्रशस्ति (1594 ई.)
    • बीकानेर दुर्ग के द्वार के पार्श्व में स्थित।
    • राव बीका से रायसिंह तक के शासकों का वर्णन।
    • मुगलों की सेवा के दौरान प्राप्त उपलब्धियों का उल्लेख।
    • रचयिता – जैता जैन मुनि।
  5. आमेर का लेख (1612 ई.)
    • कछवाह शासकों का उल्लेख।
    • मानसिंह द्वारा जमुआ रामगढ़ दुर्ग निर्माण का उल्लेख।
    • भाषा – संस्कृत, लिपि – नागरी।
  6. जगन्नाथराय का शिलालेख (1652 ई.)
    • उदयपुर जगन्नाथराय मंदिर में स्थित।
    • बापा से महाराणा जगतसिंह तक के शासकों का वर्णन।
    • हल्दीघाटी युद्ध एवं दान-पुण्य का उल्लेख।
    • रचयिता – कृष्णभट्ट।
  7. राजप्रशस्ति (1676 ई.)
    • राजसमन्द, कांकरोली राजनगर में 25 शिलाओं पर उत्कीर्ण।
    • देश का सबसे बड़ा शिलालेख।
    • रचनाकार – रणछोड़ भट्ट।
    • महाराणा राजसिंह की उपलब्धियों का वर्णन।

फारसी शिलालेख

  • अजमेर – ढाई दिन का झोंपड़ा (1200 ई.)
  • चित्तौड़ – अलाउद्दीन द्वारा खिज्राबाद नाम का उल्लेख (1325 ई.)
  • पुष्कर – जहाँगीर की विजय (1615 ई.)

ताम्रपत्र

  • आहड़ ताम्रपत्र (1206 ई.) – सोलंकी वंशावली।
  • खेरोदा ताम्रपत्र (1437 ई.) – दान भूमि का विवरण।
  • चीकली ताम्रपत्र (1483 ई.) – लाग-बाग जानकारी।
  • पुर ताम्रपत्र (1535 ई.) – कर्मावती भूमि अनुदान।

सिक्के

  • नगर (उणियारा) – 6000 मालव सिक्के।
  • रैढ़ (टोंक) – पंचमार्क सिक्के।
  • बयाना – गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्के।
  • प्रतिहार मिहिर भोज के सिक्के – वराह अंकन।
  • अजयराज के सिक्के – लक्ष्मी अंकन।
  • गधिया सिक्के – 10वीं-11वीं शताब्दी।
  • ब्रिटिश काल – कलदार रुपया।

प्रमुख साहित्यिक स्रोत

Exam Tip
पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महाकाव्य और एकलिंग महात्म्य परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
  • पृथ्वीराज विजय – जयानक
  • हम्मीर महाकाव्य – नयनचन्द्र सूरी
  • राजवल्लभ – मण्डन
  • भट्टिकाव्य – सदाशिव
  • एकलिंग महात्म्य – कुम्भा
  • अमरसार – जीवधर
  • राजरत्नाकर – सदाशिव
  • अजितोदय – जगजीवन भट्ट
  • कान्हडदे प्रबंध – पद्मनाभ
  • राव जैतसी रो छन्द – बीठू सूजा
  • वेलि क्रिसन रुकमणी री – पृथ्वीराज राठौड़

Source: शैक्षिक नोट्स एवं प्रतियोगी परीक्षा सामग्री से संकलित अध्ययन सामग्री।

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