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राजस्थान इतिहास – प्रमुख अभिलेख, ताम्रपत्र, सिक्के एवं साहित्यिक स्रोत र ाजस्थान के इतिहास के अध्ययन में शिलालेख, ताम्रपत्र, सिक्के एवं साहित्यिक स्रोत अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नीचे प्रमुख स्रोतों का विवरण दिया गया है। प्रमुख शिलालेख महत्वपूर्ण ये सभी अभिलेख राजस्थान के इतिहास, प्रशासन, समाज एवं संस्कृति की जानकारी देते हैं। चीरवे का शिलालेख (1273 ई.) चीरवा (उदयपुर) गाँव के एक मंदिर से प्राप्त संस्कृत में 51 श्लोकों का शिलालेख प्रारंभिक गुहिलवंशीय शासकों, विष्णु मंदिर की स्थापना, शिव मंदिर हेतु भू-अनुदान की जानकारी। प्रशस्तिकार रत्नप्रभसूरि, लेखक पार्श्वचन्द्र तथा शिल्पी देलहण का उल्लेख। रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.) रणकपुर के जैन चौमुखा मंदिर में स्थित। मेवाड़ के शासक बापा से कुम्भा तक की वंशावली है। नाणक शब्द का प्रयोग मुद्रा के लिये किया गया है। मंदिर के सूत्रधार दीपा या देपाक का उल्लेख है। कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति (1460 ई.) 1 से 28 तथा 162 से 187 तक श्लोक उपलब्ध हैं। बापा, हम्मीर, कुम्भा का वर्णन। कुम्भा के व्यक्तिगत गुणों एवं उपाधियों का उल्लेख। कुम्भा द्वारा रचित ग्रंथ – चण्डीशतक, गीतगोविन्द क…