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मारवाड़

मेवाड़ राजवंश का संपूर्ण इतिहास (The Complete History of Mewar Dynasty) मेवाड़ का राजवंश विश्व के सबसे प्राचीन राजवंशों में से एक है, जिसने एक ही स्थान पर सबसे लंबे समय तक शासन किया। इनका आदर्श वाक्य है- "जो दृढ़ राखे धर्म को, तिहि राखे करतार" (अर्थात् जो धर्म की रक्षा करता है, ईश्वर उसकी रक्षा करता है)। 1. मेवाड़: भौगोलिक स्थिति एवं प्राचीन नाम मेवाड़ वर्तमान राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसके अंतर्गत उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़ (आंशिक) के क्षेत्र आते हैं। प्राचीन नाम: इसे मेदपाट (मेव जाति की अधिकता के कारण), प्राग्व़ाट और शिवि जनपद (राजधानी- माध्यमिका/नगरी) के नाम से जाना जाता था। कुलदेवता: एकलिंगनाथ जी (लकुलीश संप्रदाय)। मेवाड़ के शासक स्वयं को इनका 'दीवान' मानकर शासन करते थे। कुलदेवी: बाण माता। राजध्वज: इनके ध्वज में एक ओर क्षत्रिय योद्धा और दूसरी ओर भील योद्धा (पूंजा भील का प्रतीक) अंकित है। बीच में उगता हुआ सूर्य है (सूर्यवंशी होने का प्रतीक)। 2. गुहिल वंश की उत्पत्ति (Origin of Guhil Dynasty) मेवाड़ के शासक 'सूर्यवंशी' हिंदू हैं। …