Posts
guhil rajvansh
मेवाड़ का गुहिल राजवंश: उत्पत्ति एवं सामान्य परिचय इस राजवंश का नाम इसके प्रतापी संस्थापक 'गुहिल' के नाम पर गुहिल वंश पड़ा। कालांतर में इसी राजवंश को 'गहलोत' वंश के नाम से भी जाना जाने लगा। यह विश्व का एकमात्र ऐसा राजवंश है जिसने एक ही क्षेत्र (मेवाड़) पर सबसे लंबे समय तक शासन किया। इस वंश के शासकों को सम्मानपूर्वक 'हिंदुआ सूरज' कहा जाता है। मेवाड़ के राजचिह्न पर अंकित वाक्य है— "जो दृढ़ राखे धर्म को, ताहि रखे करतार" । गुहिल वंश की उत्पत्ति के संबंध में इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। कर्नल जेम्स टॉड और श्यामलदास इन्हें गुजरात के वल्लभी नगर के शासकों से संबंधित मानते हैं। डॉ. डी.आर. भंडारकर ने आहड़ अभिलेख के आधार पर इन्हें ब्राह्मणों की संतान माना है। डॉ. गोपीनाथ शर्मा और मुहणोत नैणसी ने भी इस मत का समर्थन किया है। अबुल फजल इन्हें ईरान के बादशाह नौशेरवाँ आदिल का वंशज बताता है, जबकि डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा और मुहणोत नैणसी ने इन्हें विशुद्ध सूर्यवंशी क्षत्रिय माना है। मुहणोत नैणसी और कर्नल जेम्स टॉड ने गुहिलों की कुल 24 शाखाओं का उल्लेख किया है। गुहिल / गुहादित्य डॉ. ग…