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gurjar prtihar

गुर्जर प्रतिहार वंश: उत्पत्ति एवं ऐतिहासिक स्रोत प्राचीन उल्लेख: गुर्जर जाति का सर्वप्रथम प्रामाणिक उल्लेख चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय के 'ऐहोल अभिलेख' में मिलता है। नामकरण: 'गुर्जर-प्रतिहार' शब्द का स्पष्ट उल्लेख चंदेल वंश के शिलालेखों में प्राप्त होता है। स्थापना व विस्तार: इस राजवंश की स्थापना छठी शताब्दी के द्वितीय चरण में उत्तर-पश्चिम भारत (विशेषकर राजपूताना और गुजरात क्षेत्र) में हुई थी। अभिलेखीय साक्ष्य: नीलकण्ठ, राधनपुर, देवली तथा करहाड़ शिलालेखों में प्रतिहारों को स्पष्ट रूप से 'गुर्जर' कहा गया है। इसके अलावा स्कंद पुराण के 'पंच द्रविड़ों' में भी गुर्जरों का उल्लेख मिलता है। विदेशी यात्रियों का विवरण: अरब यात्रियों ने इन्हें 'जुर्ज' कहा है। प्रसिद्ध अरबी यात्री अल-मसूदी ने गुर्जर-प्रतिहार राज्य को 'अल-गुर्जर' और यहाँ के राजा को 'बौरा' (Bora) कहकर संबोधित किया है। उत्पत्ति के विभिन्न मत: मिहिरभोज के 'ग्वालियर अभिलेख' में नागभट्ट को भगवान राम का प्रतिहार (द्वारपाल) एवं विशुद्ध क्षत्रिय बताया गया है। इतिहासकार वी. ए. स्मिथ,…