आमेर का कच्छवाहा राजवंश कंप्लीट नोट्स - स्थापना, महत्वपूर्ण शासक और स्थापत्य कला
आमेर का कच्छवाहा राजवंश कंप्लीट नोट्स - स्थापना, महत्वपूर्ण शासक और स्थापत्य कला
राजस्थान में कछवाहा राजवंश का इतिहास राजस्थान के ढूँढाड़ क्षेत्र में कछवाहा राजपूतों का उदय 12वीं शताब्दी में हुआ। ये स्वयं को भगवान राम के पुत्र 'कुश' का वंशज मानते हैं। 1612 ई. के आमेर शिलालेख में कछवाहा शासकों को 'रघुकुल तिलक' कहा गया है। प्रारंभ में ये अजमेर के चौहानों के सामंत हुआ करते थे। महत्वपूर्ण तथ्य: कछवाहा वंश के ‘नरू’ से ‘नरूका’ और राव ‘शेखा’ से ‘शेखावत’ शाखाएँ निकलीं। राव शेखा द्वारा स्थापित राज्यक्षेत्र बाद में ‘शेखावाटी’ कहलाया। रियासत के प्रतीक एवं धार्मिक मान्यताएँ रियासत का ध्वज: प्रारंभ में ध्वज श्वेत रंग का था। मानसिंह प्रथम ने काबुल अभियान की सफलता के बाद 'पचरंगा' झंडा बनाया (नीला, पीला, लाल, हरा व काला)। इसके मध्य में सूर्य की आकृति है। राज्य चिह्न: आमेर के राज्यचिह्न में सबसे ऊपर राधा-गोविंद जी का चित्र है और नीचे 'यतो धर्मस्ततो जय:' (जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है) लिखा है। कुलदेवी: जमवाय माता (अन्नपूर्णा माता)। इनका मुख्य मंदिर जमुवारामगढ़ (जयपुर) में है। आराध्य देवी: शीला माता । इनका मंदिर आमेर दुर्ग में स्थित है (यह मूर्ति मानसिंह प्रथम बंगा…